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13 अगस्त 2009

सेकुलर पासवान को चाहिए विहिप पर प्रतिबन्ध

लगता है जमात-ए-सेकुलर के नेताओं में सबसे ज्यादा सेकुलर (यानी हिन्दू-विरोधी) साबित करने की होड़ मची हुई है. इस दौड़ में जो सबसे आगे रहेगा उसे ज्यादा से ज्यादा थोक के भाव मुस्लिम वोट मिलने की उम्मीद है. भारत में कई आंतकवादी गतिविधियों में लिप्त पाए गए सिमी जैसे जेहादी संगठन पर से प्रतिबन्ध हटाने और उससे हमदर्दी रखने वाले लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और दलितों के मसीहा रामविलास पासवान अब मुस्लिमों के मसीहा बनाने के चक्कर में हैं. हाल ही में उन्हें फिर से सेकुलर दौरा पडा है और वह विश्व हिन्दू परिषद पर प्रतिबन्ध की मांग कर रहे हैं. पासवान की नजर में बम फोड़ने वाला सिमी सही है और अब तक किसी भी आतंकवादी गतिविधी में अलिप्त रहा विहिप गलत है. और तो और खुले आम धर्मांतरण करा रही मिशनरी स्कूलों से उन्हें कोई समस्या नहीं लेकिन राष्ट्रीयता और देशभक्ति के संस्कार देने वाले संघ प्रेरित स्कूलों से भी उन्हें तकलीफ है. यानी पासवान जी की माने तो परोक्ष-अपरोक्ष रूप से देश को तोड़ने वाली शक्तियां सेकुलर और सही हैं, और देश की अस्मिता की रक्षा में जुटी संस्थाएं व संगठन साम्प्रदायिक. जे हो सेकुलरिज्म. आइए हमारे महान सेकुलर नेता ने क्या कहा, यह जानने के लिए दैनिक जागरण में छपी खबर पर गौर फरमाते हैं:
पासवान ने की विहिप पर प्रतिबंध की मांग Aug 13, 05:49 pm
गया। लोक जनशक्ति पार्टी [लोजपा] के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि राष्ट्रहित में विश्व हिंदू परिषद [विहिप] पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ [आरएसएस] के अधीन चल रहे शिक्षण संस्थानों की जांच की जानी चाहिए। लोजपा के तनी दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने बोधगया आए पासवान ने गुरुवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि विहिप देश में धर्म के नाम पर समाज को बांटने का काम करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस के शिक्षण संस्थानों में जाति और धर्म का पाठ पढ़ाया जाता है, जिसमें बच्चों में गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने विहिप पर प्रतिबंध तथा आरएसएस संचालित शिक्षण संस्थानों की जांच कराने की मांग की। पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि वह दलित और महादलित का वर्गीकरण कर समाज को तोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दलित और महादलित का संविधान में किसी प्रकार की चर्चा नहीं है। उन्होंने कहा कि लोजपा रंगभेद, धर्मभेद और जातिभेद के खिलाफ है। आज कई संगठन जाति और धर्म के नाम पर देश को खंडित करने में लगे है। (साभार: दैनिक जागरण)

05 अगस्त 2009

पासवान को चाहिए धर्म के नाम पर आरक्षण !

अपने फायदे के लिए वास्तविक दलित हितों पर कुठाराघात की साजिश.

कभी बिहार में मुस्लिम मुख्यमंत्री का झुनझुना चलाने वाले कथित दलित नेता रामविलास पासवान ने अब मुस्लिमों और ईसाइयों के आरक्षण का राग अलापना शुरू कर दिया है. चार साल पहले मुख्य मंत्री की कुर्सी के लिए लालू के घोर विरोधी रहे पासवान ने लालू के साथ केंद्र की कोंग्रेस सरकार में सत्ता सुख लिया. फिर लोकसभा चुनावों में नीतीश को हारने के लिए लालू से ही दोस्ती गाँठ ली. फिर भी हाल ही के लोकसभा चुनाव में करारी हार ही मिली. दलित नेता होने के बावजूद मायावती जैसी दूसरी दलित नेताओं से द्वेष रखकर दलित एकता में ही बाधा बननेवाले पासवान ने दलितों के नाम पर काफी सत्ता सुख भोगा. अब केवल दलितों की पैरवी से ही पेट नहीं भरता देख दलितों को छोड़ अब वह मुसलमानों के भी मसीहा बनने के फिराक में हैं. अब वह पिछडे और वंचित दलितों को मिलने वाले आरक्षण में बंटवारा करके आरक्षण की रेवड़ी मुस्लिमों और ईसाइयों के देना चाहते हैं. पासवान का मानना है कि, दलित हित और हक जाए भाड़ में मुस्लिमों और ईसाइयों को मक्खन बांटा जाए. पासवान का हिसाब सीधा-सा है... दलित हितों के नाम पर इतना सफ़र काफी है अब आगे का सफ़र दलितों का हक छीनकर मुस्लिमों व ईसाइयों में बांटकर सत्ता सुख भोगा जाए. हमारे देश में आरक्षण, केवल सत्ता हथियाने का साधन बन गया है. इस बार लालू, मुलायम, मायावती, कम्युनिस्टों और कोंग्रेस सभी को पछाड़कर पासवान ने मुस्लिम-ईसाई आरक्षण का राग छेड़ा है. यानी उन्हें क्रेडिट मिलना और थोक के भाव वोट मिलना तय है. सेकुलरिज्म यानी धर्मनिपेक्षता के नाम पर मजहब आधारित आरक्षण की मांग करना क्या साम्प्रदायिकता नहीं है? यह कौनसा सेकुलरिज्म है? जाहिर है कोई सेकुलर चैनलवाला या पत्रकार यह सवाल नहीं उठाएगा. अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछाडे वर्ग, महिलाओं और दलितों के हक छीनना कौनसा सामाजिक न्याय है? इसका जवाब भी सेकुलकर बिरादरी के पास नहीं है. हाँ, लेकिन इसका जवाब भारत के दलित और वंचित वर्ग जरूर दे सकते हैं. आइए दैनिक जागरण में छपी खबर पर गौर करते हैं...

पासवान ने खेला मुस्लिम कार्ड
दैनिक जागरण ५ अगस्त

पटना [जागरण ब्यूरो]। आम चुनावों में सूपड़ा साफ होने के बाद लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान अब बिहार में अपनी जमीन तलाशने में जुटे हैं। इस कवायद के तहत बुधवार को उन्होंने मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा उठाया।

मुस्लिम कार्ड खेलते हुए पासवान का कहना था कि नीतीश सरकार अगर अपने आपको मुस्लिमों का हितैषी कहती है तो पिछड़े मुसलमानों को नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था करे।

एस के मेमोरियल हाल में लोजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य स्तरीय सम्मेलन में पासवान ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश करे और उनकी सिफारिशों को शत प्रतिशत लागू करे। लोजपा नेता का कहना था कि दलित मुस्लिम व दलित ईसाई के लिए नौकरियों में अलग से आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए। पासवान ने कहा कि हर हाल में पिछड़े मुस्लिमों के लिए नौकरियों में दस प्रतिशत का आरक्षण किया जाना चाहिए।

पासवान ने कहा 1956 में संविधान की धारा 341 के तहत पिछड़े सिखों को भी दलितों की सूची में शामिल कर लिया गया और ठीक इसी तरह 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार ने नवबौद्धों को दलितों की सूची में शामिल कर लिया। इसी तर्ज पर यह सुविधा दलित मुसलमानों और ईसाइयों को मिलनी चाहिए.

(साभार: दैनिक जागरण)