पासवान ने की विहिप पर प्रतिबंध की मांग Aug 13, 05:49 pmगया। लोक जनशक्ति पार्टी [लोजपा] के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि राष्ट्रहित में विश्व हिंदू परिषद [विहिप] पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ [आरएसएस] के अधीन चल रहे शिक्षण संस्थानों की जांच की जानी चाहिए। लोजपा के तनी दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने बोधगया आए पासवान ने गुरुवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि विहिप देश में धर्म के नाम पर समाज को बांटने का काम करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस के शिक्षण संस्थानों में जाति और धर्म का पाठ पढ़ाया जाता है, जिसमें बच्चों में गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने विहिप पर प्रतिबंध तथा आरएसएस संचालित शिक्षण संस्थानों की जांच कराने की मांग की। पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि वह दलित और महादलित का वर्गीकरण कर समाज को तोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दलित और महादलित का संविधान में किसी प्रकार की चर्चा नहीं है। उन्होंने कहा कि लोजपा रंगभेद, धर्मभेद और जातिभेद के खिलाफ है। आज कई संगठन जाति और धर्म के नाम पर देश को खंडित करने में लगे है। (साभार: दैनिक जागरण)
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13 अगस्त 2009
सेकुलर पासवान को चाहिए विहिप पर प्रतिबन्ध
05 अगस्त 2009
पासवान को चाहिए धर्म के नाम पर आरक्षण !
पासवान ने खेला मुस्लिम कार्डदैनिक जागरण ५ अगस्तपटना [जागरण ब्यूरो]। आम चुनावों में सूपड़ा साफ होने के बाद लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान अब बिहार में अपनी जमीन तलाशने में जुटे हैं। इस कवायद के तहत बुधवार को उन्होंने मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा उठाया।मुस्लिम कार्ड खेलते हुए पासवान का कहना था कि नीतीश सरकार अगर अपने आपको मुस्लिमों का हितैषी कहती है तो पिछड़े मुसलमानों को नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था करे।
एस के मेमोरियल हाल में लोजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य स्तरीय सम्मेलन में पासवान ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश करे और उनकी सिफारिशों को शत प्रतिशत लागू करे। लोजपा नेता का कहना था कि दलित मुस्लिम व दलित ईसाई के लिए नौकरियों में अलग से आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए। पासवान ने कहा कि हर हाल में पिछड़े मुस्लिमों के लिए नौकरियों में दस प्रतिशत का आरक्षण किया जाना चाहिए।
पासवान ने कहा 1956 में संविधान की धारा 341 के तहत पिछड़े सिखों को भी दलितों की सूची में शामिल कर लिया गया और ठीक इसी तरह 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार ने नवबौद्धों को दलितों की सूची में शामिल कर लिया। इसी तर्ज पर यह सुविधा दलित मुसलमानों और ईसाइयों को मिलनी चाहिए.
(साभार: दैनिक जागरण)