13 फ़रवरी 2010

माई नेम इज पाकिस्तान!!


भारत में पाकिस्तानी खिलाड़ियों, फ़िल्मी एक्टरो और फूहड़ मसखरो का विरोध करने पर महेश भट्ट से लेकर जावेद अख्तर और उनकी बेगम तथा शाहरुख खान, आमिर खान समेत  जमात-ए-सेकुलर की पेट में मरोड़ आ जाती है.  तो दूसरी ओर लता मंगेशकर और जगजीत सिंह जैसी उम्दा भारतीय कलाकारों और फिल्मो को पाकिस्तान अपने देश में सम्मान करना तो छोड़ो कार्यक्रम तक की इजाजत नहीं देता. जबकि भारत की धरती पर जेहादी आतंक का नंगा नाच करके खून की नदिया बहाने वाले पाकिस्तान के किसी भी खिलाड़ी ने आज दिन तक कभी भी विरोध तो छोड़ो, जेहादी आंतक की जबानी निंदा व भर्त्सना तक नहीं की है. जबकि हमारे सेकुलर 'खेल और कला को राजनीति से ऊपर रखने' की दुहाई देकर उनके लिए भारत में पलक पांवड़े बिछाते रहते हैं.
हाल ही में शाहरुख खान और आमिर खान समेत जावेद अख्तर ने अपना पाकिस्तान प्रेम दर्शाया था. तो दूसरी ओर ताजा खबर ये है कि पाकिस्तान में एक भारतीय फिल्म दिखाए जाने पर सिनेमाघर को ही सील कर दिया. बहरहाल इस मुद्दे पर भारतीय सेकुलरो के मुंह भी 'सील' हो गए हैं. आइए एक नजर डालते हैं दैनिक जागरण में छपी इस खबर पर..

''इस्लामाबाद। पाक अधिकृत कश्मीर [पीओके] में भारतीय फिल्म प्रदर्शित करने पर शुक्रवार को एक सिनेमाघर सील कर दिया गया।

सरकारी संवाद एजेंसी एपीपी के मुताबिक मीरपुर में एक सिनेमाघर को भारतीय फिल्म दिखाने के कारण बंद कर दिया गया है। मीरपुर के उपायुक्त मुहम्मद तैयब ने कहा कि जब आकाश सिनेमाघर में छापा मारा गया तो वहां भारतीय फिल्म दिखाई जा रही थी। सिनेमाघर के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।''

2 टिप्‍पणियां:

Suresh Chiplunkar ने कहा…

"सेकुलर्स" तो दोमुंहे साँप हैं यह सिद्ध हो चुका है…। शाहरुख खान की फ़िल्म के लिये इतना हंगामा सिर्फ़ इसीलिये किया गया है क्योंकि इससे एक कमजोर ही सही लेकिन पुराने "हिन्दुत्ववादी" ठाकरे को नीचा दिखाने का मौका हाथ लगा था…। जब गुजरात में आमिर की फ़िल्म पर प्रतिबन्ध लगा था उस समय ऐसा हंगामा नहीं हुआ था, क्योंकि नरेन्द्र मोदी से पंगा लेना थोड़ा मुश्किल "रिस्क" हो सकती थी, जबकि ठाकरे को बेइज्जत करना आसान था…। शाहरुख खान को एक "मुस्लिम आईकॉन" के रूप में प्रस्तुत किये जाने के दूरगामी विकृत परिणाम होंगे…

कमलेश वर्मा ने कहा…

agli bar govinda ki jagah ho sakta ram naik ke mukable sharukh ko tickt dene ki vjh se congress gir gir ke uski film ko release karwane me itna lobh dikharahi hai ..jaise muradabad se fir se azaharuddin ko 'fix'' kar diya tha ,aur south se aa ke pattha jit bhi gya sirf is karke uski yogyta shahrukh se milti hai ...pseudo.secularist...