आजाद हिन्दुस्तान में जिन शब्दों ने सबसे ज्यादा गुमराह किया है, उनमें से एक है “सेकुलर”. इसी के सही मायने समझने-समझाने और भारत की सेकुलर राजनीति का पर्दाफाश करने के साथ ही मुख्यधारा के मीडिया, विचारकों की दुनिया में घुसे तथाकथित सेकुलर-वादियों की खरपतवार के पाखंड को उजागर करना ही हमारा लक्ष्य है. यह एक गैर-राजनीतिक मंच है. और देश में सर्वधर्म समानता, सदभाव, और राष्ट्र की अस्मिता के रक्षण के लिए समर्पित इस अभियान में आपके सहयोग की अपेक्षा है. वंदेमातरम! जयहिंद !
25 मार्च 2010
कविता: तुम्हारी हत्या पर भी रख लेंगे २ मिनट का मौन
तुम्हारी हत्या पर भी रख लेंगे २ मिनट का मौन
(अभागे भारतीय की फरियाद पर 'सिक्युलर' नेता द्वारा दी गई सलाह की तरह पढ़ें)
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अच्छा!!! वो दुश्मन है? बम फोड़ता है? गोली मारता है?
मगर सुन - दोस्ती में - इतना तो सहना ही पड़ता है
तय है - जरुर खोलेंगे एक और खिड़की - उसकी ख़ातिर
मगर - हम नाराज़ हैं - तेरे लिए इतना तो कहना ही पड़ता है
तुम भी तो बड़े जिद्दी हो - दुश्मन भी बेचारा क्या करे
इतने बम फोड़े - शर्म करो - तुम लोग सिर्फ दो सौ ही मरे ?
चलो ठीक है - इतने कम से भी - उसका हौंसला तो बढ़ता है
और फिर - तुम भी तो आखिर १०० करोड़ हो(*) - क्या फर्क पड़ता है?
[(*) ११५ करोड़ में १५ करोड़ तो विदेशी घुसपैठिये हमने ही तो अन्दर घुसाएँ हैं वोटों के लिए]
अच्छा! समझौते की गाड़ियों में दुश्मन भी आ जाते हैं???
क्या हुआ जो दिल लग गया यहाँ - और यहीं बस जाते हैं
बेचारे - ये तो वहां का गुस्सा है - जो यहाँ पर उतारते हैं
वहां पैदा होने के पश्चाताप में - यहाँ पर तुम्हें मारते हैं (क्यों न मारें?)
क्या सोचता है तू ? मरना था जिनको - वो तो गए मर
तू तो जिन्दा है ना - तो चल - अब मरने तक हमारे लिए काम कर
और क्या औकात थी उन मरने वालों की ? सिर्फ २०० रुपये मासिक कर (*१)
हम क्या शोक करें - क्यों शोक करें अब - ऐसे वैसों की मौत पर ?
अच्छा! आतंकवादी तुम्हें लूटता है? मारता है? मजहब के नाम पर ?
पर आतंकवादी का तो कोई मजहब ही नहीं होता - कुछ तो समझा कर (बेवकूफ कहीं के)
तू सहिष्णु है - भारत सहिष्णु है - यह भूल मत - निरंतर याद कर
क्या कहा? आत्मरक्षार्थ प्रतिरोध का अधिकार? - बंद यह बकवास कर (अबे,वोट बैंक लुटवायेगा क्या)
इन बेकार की बातों में - न अपना कीमती वक्त बरबाद कर
भूल जा - कुछ नहीं हुआ - जा काम पर जा - काम कर
तेरे गुस्से की तलवार को - हमारी शांति की म्यान में रख
हमने दे दिया है ना कड़ा बयान - ध्यान में रख
जानते हैं हम - इस बयान पर - वो ना देगा कान
चिंता ना कर - तैयार है - एक इस से भी कड़ा बयान
दे रक्खा है उसे - सबसे प्यारे देश का दरजा (*२)
चुकाना तो पड़ेगा ना - इस प्यार का करजा
दुनिया भर से - कर दी है शिकायत - कि वो मारता है
दुनिया को फुरसत मिले - तब तक तू यूँ ही मर जा
किस को पड़ी है कि - कौन मरा - और मार गया कौन
आराम से मर - तेरे लिए भी रख लेंगे - २ मिनट का मौन
*1 : Profession Tax Rs.200/-per month
*2 : Most Favoured Nation
रचयिता : धर्मेश शर्मा संशोधन, संपादन : आनंद जी. शर्मा
23 मार्च 2010
ये बाबा ! ना बाबा, ना !
गौर करने लायक बात ये है कि, इन बाबाओ में अधिकाँश मुस्लिम हैं. लेकिन अपने विज्ञापनों में पूज्य साईं बाबा का फोटो और ॐ जैसे हिन्दू प्रतीक भी लगाते हैं (शायद शर्म-निरपेक्षता की सबसे बड़ी मिसाल यही बाकी है).
मजे की बात है अब तक किसी भी प्रगतिशील/अंधश्रद्धा निर्मूलन संगठन/ शर्म-निरपेक्ष चैनल /पत्रकार ने इनकी खबर नहीं ली ना ही इसके खिलाफ किसी ने आवाज़ उठाई. कोर्ट ने भी इनके खिलाफ संज्ञान नहीं लिया.
और ना ही यह सुनने में आया कि लोकल रेलवे में अनाधिकृत रूप से और गुमराह करने वाले विज्ञापन लगाने के लिए रेलवे ने कभी कोई कार्रवाई की हो!! जबकि इनका पता और फोन नंबर भी विज्ञापनों में दिया जाता है. और भोली-भाली जनता को ठगने का यह धंधा खुले आम चलता है.
इससे भी ज्यादा मजे की बात ये है कि सेकुलरो की सरपरस्ती में मुल्ला हमेशा वन्देमातरम गाने, नसबंदी कराने, हिन्दू त्यौहार मनाने के खिलाफ बार-बार फतवा जारी करने को आतुर रहते हैं. लेकिन हिन्दू प्रतीकों का इस्तेमाल करके प्रजा को मूर्ख बनाकर गाढी कमाई करनेवाले इन बाबाओं के खिलाफ किसी भी मुल्ले ने फतवा नहीं निकाला.
बात-बेबात पर हिन्दू संतो को आरोपों के आधार पर ही बदनाम करने को बेताब रहने वाले मीडिया की इस विषय में खामोशी हैरत अंगेज है.
शायद सेकुलर मीडिया अपनी नपुंसकता का इलाज करने के लिए इन बाबाओं के पास जाता हो??
16 मार्च 2010
आरक्षण के लिए मुस्लिमो की धमकी!
वोट बैंक के लालच में जब कोंग्रेस का प्रधानमंत्री यह कहे कि इस देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का है. जब पासवान जैसे नेता बिहार में मुस्लिम मुख्यमंत्री की वकालात करे. जब गांधी परिवार का युवराज देश का प्रधानमंत्री मुस्लिम को बनाने का झुनझुना बजाये तो लाजिमी है कि मुस्लिम आरक्षण के लिए दादागिरी करें. मजे की बात ये है कि अपनी मजहबी कट्टरता और अन्य कारणों से पिछड़ा रहनेवाला मुस्लिम समाज अपने पिछड़ेपन की जिम्मेदारी का ठीकरा देश पर फोड़कर अपना तथाकथित हक़ मांग रहा है. सच्चर और रंगनाथ मिश्र जैसे महानुभावो की रिपोर्टो ने अब उनके हौंसले और बुलंद हो गए हैं. तो इधर विकास, सुशासन, महंगाई, ईमानदारी और नैतिकता जैसे मुद्दों पर फिसड्डी साबित हो रहे कोंग्रेस, कम्युनिस्ट और सपा-बसपा-राजद-पासवान जैसे दल आरक्षण की रेवडिया बांटकर सत्ता सुख भोगने को आतुर हैं. देश जाए भाड़ में, प्रतिभाएं भी जाए भाड़ में, एकता और समानता भी जाए भाड़ में...बस इन्हें सत्ता चाहिए..
आइए इस सम्बन्ध में बीबीसी हिन्दी पर छपी खबर पर गौर करते हैं..
आरक्षण नहीं तो वोट नहीं' का नारा
उमर फ़ारूक़ | बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद से
सेकुलर उवाच:
''राज्य सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि मुसलमान छात्रों को अगले वर्ष भी आरक्षण का फ़ायदा मिले और इस संबंध में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है.'' मुहम्मद अली शब्बीर, कांग्रेसी नेता
मीडिया को चर्च के पाप नहीं दिखते !
19 फ़रवरी 2010
'खान' में नहीं है जान !
जनमानस में इस्लाम के जेहादी स्वरूप को भुलाने के लिए 'छवि सुधारक अभियान' के तहत बनाई गयी फिल्म माय नेम इज खान अब चारो खाने चित्त होती नजर आ रही है. 'खान' भयभीत-पोषित मीडिया चाहे कुछ भी दावे कर ले लेकिन जनता ने लगभग इस फिल्म को ठुकरा दिया है और इसका हश्र सैफ अली खान अभिनीत कुर्बान जैसी होने की पूरी उम्मीद है. शिव सेना के विरोध और मीडिया द्वारा खान-गुणगान के कारण शुरूआत में भले ही इस फिल्म ने शाहरुख के अंधभक्तो की भीड़ जुटाई हो लेकिन अब यह खेल लंबा नहीं चल रहा है. क्योंकि लोग झांसे में आकर एक बार फिल्म देखने भले ही चले जाए, बार-बार उन्हें बेवकूफ बनाना मुश्किल है. शायद लोगो की समझ में भी आ गया होगा की माय इज इज खान पर १०-२० रुपये खर्च करके उसे पायरेटेड सीडी पर देखना ही मुनासिब है. कोंग्रेस और मेडम सोनिया के करीबी शाहरुख खान की लाज बचाने के लिए अब एक ही उपाय है कि भोंदू युवराज की युवक कोंग्रेस या एन एस यु आई टिकट खरीदकर लोगो में मुफ्त बांटे. पीवीआर सिनेमा में थियेटर की सीट-भराई ९०% गिरकर सोमवार को ५०% हो गयी. वही स्पाइस सिनेमा का कहना है कि, .. खान की टिकट बिक्री में बुधवार को २०% और गुरूवार को ३०% गिरावट आई. बिना मनोरंजक गुणों के सिर्फ प्रोपेगेंडा के लिए बनाई जाने वाली फिल्मो का हश्र ऐसा ही होता है. विस्तार से पढने के लिए वन इंडिया पोर्टल पर छपी खबर पर गौर करें. लिंक दिया जा रहा है... |
13 फ़रवरी 2010
मेरा मीडिया महान: युवराज के बाद अब खान का यशोगान!
माई नेम इज पाकिस्तान!!
31 जनवरी 2010
बोर्डर पार करने की सजा और मजा !
- राशन कार्ड
- पासपोर्ट (एक या अधिक)
- हज सबसिडी
- ड्राइविंग लायसेंस
- वोटर परिचय-पत्र
- नौकरी में आरक्षण
- बैंक लोन में आरक्षण
- अल्पसंख्यक (वोट बैंक) होने के नाते विशेष सुविधाएं
- क्रेडिट कार्ड
- रियायती किराया या घर खरीदने के लिए लोन
- मुफ्त शिक्षा
- मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं.
- आपकी चाकरी में सेकुलर मीडिया
- नई दिल्ली में आपकी पैरवी करने वाले वकील, मानवाधिकार वादी और सेलिब्रिटी.
- सेकुलरिज्म पर बड़ी-बड़ी बाते करने का हक, जो आपको अपने मुल्क में कभी ना मिला.
- और हाँ सबसे बड़ा हथियार---वोट डालने का अधिकार!
23 नवंबर 2009
२६/११ की बरसी और अजमल की बिरयानी !
अजमल का आरोप, मेरे खाने में ड्रग्स
Nov 18, 12:00 am
22 नवंबर 2009
बयान-ए-सेकुलर : १
अजहरुद्दीन पर लगा प्रतिबन्ध हटा देना चाहिए.--राजीव शुक्ला, कोंग्रेसी नेता.(क्योंकि जनाब अजहर वह सब काबिलियत रखते हैं जो सेकुलरों को भाती हैं और इस देश को डूबाती हैं. मसलन वह कोंग्रेसी सांसद हैं, मैच फिक्सिंग के आरोपी रह चुके हैं, मुस्लिम हैं, मैच फिक्सिंग प्रकरण के दौरान विदेश भागकर, मुस्लिम होने के नाते भारत सरकार द्वारा भेदभाव करने का आरोप लगा चुके हैं.) इनकी ज्यादा और असली तारीफ़ पढनी है तो जनोक्ति पढ़ें. बड़ा सटीक लिखा है.
सेकुलर को नहीं दोष गुसाई-१
पैरोल के तरीके पर सरकार को फटकार
05 नवंबर 2009
मेरा सेकुलर महान!
तसलीमा को देश निकाला,
हुसैन को मिले सम्मान.
हिन्दू द्वेष को मिलता है
इस देश में सेकुलर नाम.
कभी नंगे पैर घुमकर
कभी देवताओं के नंगे चित्र
अपने मोल बढाने की
ये प्रथा चली विचित्र.
वोट के खातिर घुटने टेके
विकृत के सामने सरकार.
सोया हिन्दू कब करेगा
इस जुल्म का प्रतिकार.
करे प्रतिकार तो मीडिया भौंके,
भौंके सारा जहां,
इसी को कहते हैं भारत का
मेरा सेकुलर महान.
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13 अगस्त 2009
सेकुलर पासवान को चाहिए विहिप पर प्रतिबन्ध
पासवान ने की विहिप पर प्रतिबंध की मांग Aug 13, 05:49 pmगया। लोक जनशक्ति पार्टी [लोजपा] के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि राष्ट्रहित में विश्व हिंदू परिषद [विहिप] पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ [आरएसएस] के अधीन चल रहे शिक्षण संस्थानों की जांच की जानी चाहिए। लोजपा के तनी दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने बोधगया आए पासवान ने गुरुवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि विहिप देश में धर्म के नाम पर समाज को बांटने का काम करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस के शिक्षण संस्थानों में जाति और धर्म का पाठ पढ़ाया जाता है, जिसमें बच्चों में गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने विहिप पर प्रतिबंध तथा आरएसएस संचालित शिक्षण संस्थानों की जांच कराने की मांग की। पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि वह दलित और महादलित का वर्गीकरण कर समाज को तोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दलित और महादलित का संविधान में किसी प्रकार की चर्चा नहीं है। उन्होंने कहा कि लोजपा रंगभेद, धर्मभेद और जातिभेद के खिलाफ है। आज कई संगठन जाति और धर्म के नाम पर देश को खंडित करने में लगे है। (साभार: दैनिक जागरण)
09 अगस्त 2009
हाशमी और महेश भट्ट की नौटंकी
07 अगस्त 2009
महाराष्ट्र सरकार द्वारा पुलिस में १०% मुस्लिम आरक्षण का नजराना
चुनाव के ठीक पहले अब पुलिस में भी सेकुलरवाद और सच्चरवाद का काला साया करीब तीन माह बाद महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में भला राज्य की कोंग्रेस-एनसीपी सरकार थोक के भाव मिलने वाले मुस्लिम वोटों को कैसे अनदेखा कर सकती है? लिहाजा इस 'सेकुलर' सरकार ने महासेकुलर सच्चर रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस विभाग में १०% मुस्लिम आरक्षण का झुनझुना थमा दिया है. इसके साथ ही पुलिस की नौकरी में चयन से पूर्व शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए २.१७ करोड़ भी आबंटित किये हैं. और पुलिस महकमे में मुस्लिमों की विशेष भर्ती को गति देने के लिए सरकारी खर्च पर महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में शिविर भी आयोजित किये जायेंगे. करदाताओं की गाढी कमाई से अपने वोट बैंक की चापलूसी करना कौनसा सेकुलरिज्म है? यह तो शायद सोनिया, पवार, राहुल जैसे लोग ही बता पाएंगे. एक तरफ प्रदेश की पुलिस लाठी और पुराने हथियारों के बल पर अति-आधुनिक हथियारों और एके-४७ से लैस बेरहम आतंकवादियों का सामना करने को मजबूर है. जिसके आधुनिकरण और सक्षम बनाने का मुद्दा धुल चाट रहा है, लेकिन मुस्लिमों के कथित पिछडेपन के नाम पर अपनी वोट बैंक की रोंटियाँ सेंक कर कोंग्रेस-एनसीपी सरकार आतंरिक सुरक्षा के लिहाज से अहम पुलिस विभाग का कबाडा करने पर तुली हुई है. आरक्षण एक बार फिर वोट हथियाने का बहाना बन गया है. मजे की बात ये है कि महाराष्ट्र की इस सेकुलर सरकार के सेकुलर अल्पसंख्यक मंत्री अनीस अहमद द्वारा के 'अल्पसंख्यकों' के नाम पर खेले गए इस खेल में सिख, ईसाई, पारसी, नवबौद्ध और जैन सरीखे अल्पसंख्यक वर्गों का कोई व्यवस्था नहीं है. खैर, आइए अंगरेजी अखबार DNA, Mumbai में इस सम्बन्ध में छपे समाचार पर गौर करते हैं: |
State wants 10% of cops to be Muslims |
Allocates Rs2.17 crore to set up pre-selection camps for minorities in all districts |
Surendra Gangan |
To raise the percentage of Muslims in the police force from from 4 to 10, the state minority department has introduced an ambitious pre-selection training programme that aims to train 3,500 youth from minorities sections. The state has allocated a fund of Rs2.17 crore for the two-month camps in all districts across the state. It has also proposed to hike the attendance allowance to Rs2,000 per year for minority students in classes V to VII to decrease the dropout rate. (Source: DNA, Mumbai, 06 August, 2009) |
05 अगस्त 2009
पासवान को चाहिए धर्म के नाम पर आरक्षण !
पासवान ने खेला मुस्लिम कार्डदैनिक जागरण ५ अगस्तपटना [जागरण ब्यूरो]। आम चुनावों में सूपड़ा साफ होने के बाद लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान अब बिहार में अपनी जमीन तलाशने में जुटे हैं। इस कवायद के तहत बुधवार को उन्होंने मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा उठाया।मुस्लिम कार्ड खेलते हुए पासवान का कहना था कि नीतीश सरकार अगर अपने आपको मुस्लिमों का हितैषी कहती है तो पिछड़े मुसलमानों को नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था करे।
एस के मेमोरियल हाल में लोजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य स्तरीय सम्मेलन में पासवान ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश करे और उनकी सिफारिशों को शत प्रतिशत लागू करे। लोजपा नेता का कहना था कि दलित मुस्लिम व दलित ईसाई के लिए नौकरियों में अलग से आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए। पासवान ने कहा कि हर हाल में पिछड़े मुस्लिमों के लिए नौकरियों में दस प्रतिशत का आरक्षण किया जाना चाहिए।
पासवान ने कहा 1956 में संविधान की धारा 341 के तहत पिछड़े सिखों को भी दलितों की सूची में शामिल कर लिया गया और ठीक इसी तरह 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार ने नवबौद्धों को दलितों की सूची में शामिल कर लिया। इसी तर्ज पर यह सुविधा दलित मुसलमानों और ईसाइयों को मिलनी चाहिए.
(साभार: दैनिक जागरण)
01 अगस्त 2009
सेकुलर-साहबजादे का कारनामा!
29 जुलाई 2009
सेकुलर सा'ब, तो भ्रष्टाचार माफ़!
कांग्रेस ने आनंद से पल्ला झाड़ा
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने अदालत की अवमानना के मामले में दोषी करार दिए गए बीएमडब्ल्यू मामले के अभियुक्त संजीव नंदा के वकील आर के आनंद से खुद को दूर कर लिया है। आनंद ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर 2004 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था।पार्टी प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा कि यह आनंद और न्यायालय के बीच का मामला है। हमें इस मामले के संबंध में कोई राजनीतिक बयान नहीं देना है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखने का निर्णय दिया, जिसमें आनंद को अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया गया था।
इससे पहले, हाईकोर्ट ने एक समाचार चैनल के स्टिंग ऑपरेशन के आधार पर आनंद को दोषी ठकराया था। स्टिंग में दिखाया गया था कि बीएमडब्लयू मामले के अभियुक्त संजीव नंदा के वकील आनंद इस मामले में सरकारी वकील आई. क्यू. खान के साथ मिलकर नंदा को बचाने के लिए प्रयास कर रहे थे।
विधि जगत ने भी की सराहना:----
बीएमडब्ल्यू मामले में अदालत की अवमानना करने वाले जानेमाने वकील आर के आनंद की सजा बरकरार रखे जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की विधि जगत में यह कहते हुए सराहना की गई कि यह निर्णय वकालत के पेशे के लिए अच्छा है और इससे तंत्र को साफ सुथरा बनाने में मदद मिलेगी।
जानेमाने वकील राम जेठमलानी और के.टी.एस. तुलसी ने इस फैसले का यह कहते हुए स्वागत किया कि इससे पेशे की 'गरिमा' बहाल करने में मदद मिलेगी। बीएमडब्ल्यू 'हिट एंड रन' मामले में संजीव नंदा का बचाव करने वाले जेठमलानी ने कहा, 'मैं फैसले से खुश हूं लेकिन चीजें अभी भी छिपी हुई हैं और किसी दिन उन्हें भी उजागर होना होगा। यह हमारे लिए और विधि तंत्र के लिए अच्छा है। वह [आनंद] सजा का हकदार है क्योंकि उसने अपने मुवक्किल की कीमत पर रुपया कमाने की कोशिश की।
के.टी.एस. तुलसी ने कहा कि सत्य की विजय हुई। टेप की रिकॉर्डिंग की विश्वसनीयता पर कभी कोई संदेह नहीं था। यह बेहद दुख की बात है कि अंतिम निर्णय आने में लंबा समय लगा। लेकिन मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने वकालत के पेशे के महत्व को दोहराया और यह समाज एवं अदालत का कर्तव्य है। वकीलों के लिए आत्मनिरीक्षण की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि हम वकीलों को यह याद रखने की जरूरत है कि वकालत का पेशा कोई व्यापार या व्यवसाय नहीं बल्कि एक नोबेल पेशा है।
अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि आनंद पर उम्रभर के लिए प्रैक्टिस करने पर रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि उन्होंने जो किया, वह 'पेशागत मूलभूत दुराचरण' है। उन्होंने कहा कि यह एक अलग मामला नहीं है। कई मामलों में गवाहों को प्रभावित किया गया और बार काउंसिल उन प्रभावशाली वकीलों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने में विफल रही। भूल करने वाले वकीलों के लिए यह मामला एक नजीर पेश करेगा। भूषण ने कहा कि बार काउंसिल की विफलता को देखते हुए वकीलों के लिए कोई आंतरिक नियामक निकाय होना चाहिए.
(Source:दैनिक जागरण) Jul 29, 05:23 pm